कोहली का तूफान, न्यूजीलैंड ढेर! वडोदरा ODI में भारत की धमाकेदार जीत, जानिए पूरी कहानी

कोहली का तूफान, न्यूजीलैंड ढेर! वडोदरा ODI में भारत की धमाकेदार जीत, जानिए पूरी कहानी

हमने वडोदरा के बारोड़ा क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेले गए पहले एकदिवसीय मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम का एक पूर्ण, संतुलित और आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन देखा। लक्ष्य था 301 रन, और जवाब में भारत ने यह लक्ष्य न केवल हासिल किया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि घरेलू परिस्थितियों में यह टीम कितनी मजबूत है। यह जीत चार विकेट से दर्ज की गई, लेकिन खेल के अधिकांश हिस्से में भारत का नियंत्रण स्पष्ट रूप से दिखाई देता रहा।

Virat Kohli की क्लास, जिसने मैच को बना दिया यादगार

जब रोहित शर्मा जल्दी आउट हुए, तब पारी को संभालने की जिम्मेदारी अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली ने उठाई। उन्होंने 91 गेंदों में 93 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें संयम, तकनीक और आक्रामकता का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। यह उनका लगातार पांचवां वनडे अर्धशतक रहा, जो उनकी निरंतरता और फिटनेस का प्रमाण है।

कोहली की पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने रन चेज को किस तरह नियंत्रित करना है, यह भी दिखाया। स्ट्राइक रोटेशन, खराब गेंदों पर बाउंड्री और दबाव में शांत रहना—यह सब एक मास्टरक्लास जैसा था।

कप्तान Shubman Gill और उपकप्तान Shreyas Iyer का अहम योगदान

हमने देखा कि कप्तान शुभमन गिल ने 56 रनों की सधी हुई पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी में परिपक्वता साफ नजर आई। उन्होंने कोहली के साथ साझेदारी बनाकर रन रेट को पूरी तरह नियंत्रण में रखा।

वहीं, श्रेयस अय्यर ने 49 रनों की तेज लेकिन जिम्मेदार पारी खेली। मिडिल ऑर्डर में उनकी मौजूदगी भारत के लिए बेहद अहम साबित हुई। इन तीनों बल्लेबाजों की वजह से लक्ष्य कभी भी मुश्किल नहीं लगा।

न्यूजीलैंड की पारी: अच्छी शुरुआत, कमजोर अंत

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 300/8 का स्कोर खड़ा किया। सलामी बल्लेबाजों डेवोन कॉनवे और हेनरी निकोल्स के बीच 117 रनों की साझेदारी हुई, जिसने एक समय भारत को दबाव में डाला। लेकिन जैसे ही यह साझेदारी टूटी, न्यूजीलैंड की पारी लड़खड़ा गई।

38वें ओवर तक स्कोर 198/5 हो गया, जिससे साफ हो गया कि टीम 20–25 रन पीछे रह गई है। आखिरी ओवरों में रन गति बढ़ाने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने वापसी का मौका नहीं दिया।

भारतीय तेज गेंदबाजों की रणनीति और अनुशासन

हम मानते हैं कि इस जीत की नींव भारतीय तेज गेंदबाजों ने रखी। Mohammed Sirajहर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा की तिकड़ी ने गति में बदलाव, स्लोअर बाउंसर और सटीक यॉर्कर से न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को बांधकर रखा।

विशेष रूप से मिडिल ओवर्स में गेंदबाजी इतनी प्रभावी रही कि न्यूजीलैंड खुलकर शॉट नहीं खेल सका। दबाव में विकेट गिरे और रन गति पर पूरी तरह अंकुश लग गया।

रात में बल्लेबाजी आसान, फिर भी भारतीय अनुशासन अहम

हालांकि कुछ गेंदें नीचे रहीं, लेकिन कुल मिलाकर फ्लडलाइट्स में बल्लेबाजी आसान दिखी। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों में अनुभव की कमी साफ नजर आई। काइल जैमीसन को छोड़कर कोई भी गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों को लगातार चुनौती नहीं दे सका।

इसका फायदा भारतीय बल्लेबाजों ने पूरी तरह उठाया और रन चेज को कभी भी पटरी से उतरने नहीं दिया।

जडेजा और कोहली के विकेट, फिर भी नहीं घबराया भारत

एक समय दो ओवरों में कोहली, रविंद्र जडेजा और श्रेयस अय्यर के विकेट गिरे, लेकिन तब भी भारत के डगआउट में घबराहट नहीं थी। इसका कारण था गहराई वाला बल्लेबाजी क्रम और लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी स्थिति।

केएल राहुल की शांति और वॉशिंगटन सुंदर का जज्बा

अंत में KL Rahul ने नाबाद 29 रन बनाकर पारी को संभाला। उनके साथ वॉशिंगटन सुंदर घायल होने के बावजूद मैदान पर डटे रहे। बाईं ओर खिंचाव की समस्या के बावजूद उनका क्रीज पर टिके रहना टीम भावना का उदाहरण रहा।

भारत ने एक ओवर शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया और श्रृंखला में बढ़त बना ली।

ध्रुव जुरेल की एंट्री: मौके के लिए तैयार

ऋषभ पंत के साइड स्ट्रेन के कारण बाहर होने के बाद Dhruv Jurel को टीम में शामिल किया गया। यह कॉल-अप उनके लिए बिल्कुल सही समय पर आया है। विजय हजारे ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है—7 पारियों में 558 रन, औसत 93 और स्ट्राइक रेट 122.90।

यदि उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ डेब्यू का मौका मिलता है, तो वह पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे।

अंपायरिंग में बांग्लादेशी उपस्थिति

मैच के दौरान बांग्लादेश के शर्फुद्दौला इब्ने शाहिद सैकत टीवी अंपायर की भूमिका में नजर आए। संभावना है कि वह इस द्विपक्षीय श्रृंखला के अन्य मुकाबलों में ऑन-फील्ड अंपायर के रूप में भी दिखें।

निष्कर्ष: कोहली की निरंतरता, भारत की मजबूती

हमारे लिए यह मुकाबला सिर्फ एक जीत नहीं था, बल्कि यह संकेत था कि भारतीय टीम वनडे प्रारूप में कितनी स्थिर, संतुलित और खतरनाक है। विराट कोहली की निरंतरता, युवा कप्तान शुभमन गिल का नेतृत्व और गेंदबाजों का अनुशासन—इन सभी ने मिलकर भारत को एक मजबूत इकाई बनाया है।

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