यह वृद्धि न केवल भारत की आंतरिक मांग, बल्कि सरकारी खर्च, निजी निवेश, और नीतिगत सुधारों का सीधा परिणाम है। हम यह मानते हैं कि यही कारण है कि भारत आज वैश्विक मंच पर एक स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुमान: बाजार से बेहतर प्रदर्शन
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी अनुमान बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.3%–6.8% के सरकारी अनुमान से कहीं आगे निकल चुकी है। यह संकेत देता है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से अधिक तेज हैं और उनका प्रभाव दीर्घकालिक विकास पर सकारात्मक पड़ रहा है।
हम देखते हैं कि यह अनुमान आगामी केंद्रीय बजट (1 फरवरी) के लिए आधार बनेगा, जिससे नीति निर्धारण और वित्तीय आवंटन अधिक यथार्थवादी और विकासोन्मुख होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधार: विकास को गति देने वाली नीतियां
हम मानते हैं कि भारत की इस मजबूत आर्थिक स्थिति के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों की बड़ी भूमिका है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- उपभोक्ता कर प्रणाली (GST) में व्यापक सुधार
- श्रम सुधारों का कार्यान्वयन, जो वर्षों से लंबित थे
- घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने वाली योजनाएं
- निवेश-अनुकूल नीतिगत वातावरण
इन सुधारों ने न केवल उद्योगों का बोझ कम किया, बल्कि व्यापार सुगमता और रोजगार सृजन को भी नई दिशा दी।
निजी उपभोग: GDP का मजबूत स्तंभ
भारत की GDP में लगभग 60% योगदान निजी उपभोग का है। मौजूदा अनुमानों के अनुसार, निजी उपभोग में 7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह दर्शाता है कि:
- ग्रामीण और शहरी मांग स्थिर बनी हुई है
- आय स्तर में सुधार हुआ है
- उपभोक्ता विश्वास मजबूत हुआ है
हम देखते हैं कि यही उपभोग-आधारित वृद्धि भारत को वैश्विक मंदी के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रखती है।
सरकारी खर्च और पूंजी निवेश: विकास की रीढ़
सरकारी खर्च में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 5.2% की वृद्धि का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 2.3% की तुलना में कहीं अधिक है। इसके साथ ही:
- निजी निवेश में 7.8% की वृद्धि
- पूंजीगत व्यय (Capital Investment) में निरंतर विस्तार
- इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तेज प्रगति
हम यह मानते हैं कि यह संयोजन भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता को और मजबूत करता है।
अमेरिकी टैरिफ और भारत के निर्यात पर सीमित प्रभाव
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत के कुछ प्रमुख निर्यातों पर 50% टैरिफ लगाए गए हैं, विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद को लेकर। इसके बावजूद, भारत के कुल निर्यात पर इसका प्रभाव अब तक सीमित रहा है।
हम देखते हैं कि:
- निर्माण क्षेत्र की वृद्धि स्थिर बनी हुई है
- वैकल्पिक बाजारों की ओर निर्यात विविधीकरण हुआ है
- घरेलू मांग ने निर्यात दबाव की भरपाई की है
यही कारण है कि भारत की आर्थिक गति पर अमेरिकी टैरिफ का असर अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।
निर्माण क्षेत्र: दोबारा रफ्तार पकड़ता उद्योग
निर्माण क्षेत्र, जो GDP का लगभग 13% योगदान देता है, चालू वित्त वर्ष में 7% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 4.5% था। यह स्पष्ट संकेत है कि:
- उद्योगों में मांग बढ़ रही है
- उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग हो रहा है
- सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं प्रभावी साबित हो रही हैं
हम यह मानते हैं कि निर्माण क्षेत्र की यह मजबूती रोजगार और निर्यात दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है।
निर्माण (Construction) और कृषि क्षेत्र की स्थिति
निर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान है, हालांकि यह पिछले वर्ष के 9.4% से कम है। इसके बावजूद, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश इसे स्थिर बनाए हुए है।
वहीं कृषि क्षेत्र, जो भारत की 40% से अधिक कार्यबल को रोजगार देता है, में 3.1% की वृद्धि का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 4.6% से कम जरूर है, लेकिन:
- मौसम की अनिश्चितता
- उत्पादन लागत
- बाजार मूल्य उतार-चढ़ाव
के बावजूद यह प्रदर्शन संतुलित माना जा सकता है।
भारत बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
सरकारी बयान के अनुसार, भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का स्थान हासिल कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से इसकी औपचारिक पुष्टि अपेक्षित है।
हम यह देखते हैं कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक नीतियों, घरेलू बाजार की ताकत, और दीर्घकालिक दृष्टि का प्रमाण है।
नाममात्र GDP और मुद्रास्फीति का प्रभाव
नाममात्र GDP, जिसमें मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल होता है, के 8% की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह फरवरी में घोषित बजट अनुमान 10.1% से कम है, लेकिन फिर भी:
- मुद्रास्फीति नियंत्रण में
- विकास संतुलित
- आर्थिक स्थिरता बनी हुई
हम मानते हैं कि यह संयमित वृद्धि दीर्घकाल में अधिक टिकाऊ सिद्ध होगी।
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