हम भारत के कॉरपोरेट इतिहास के एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं, जहां जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का प्रस्तावित IPO (Initial Public Offering) न केवल निवेशकों बल्कि पूरे वैश्विक बाजार की नजरों का केंद्र बन चुका है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली यह दिग्गज डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी वर्ष 2026 में अपने IPO के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है, जो इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बना सकता है।
2.5% हिस्सेदारी बिक्री और $4.5 बिलियन जुटाने की योजना
हमारे सामने उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंक Jefferies ने Reliance Jio का वैल्यूएशन लगभग $180 बिलियन आंका है। इस वैल्यूएशन पर यदि कंपनी 2.5% हिस्सेदारी बेचती है, तो इससे लगभग $4.5 बिलियन (करीब ₹37,000 करोड़) जुटाए जा सकते हैं। यह आंकड़ा Hyundai Motor India के $3.3 बिलियन IPO से भी कहीं बड़ा है, जिसने पिछले वर्ष बाजार में रिकॉर्ड बनाया था।
यह प्रस्तावित IPO न केवल भारत बल्कि दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम IPOs में शामिल हो सकता है।
भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम नेटवर्क: 50 करोड़ से अधिक यूजर्स
हम यह स्पष्ट रूप से देख रहे हैं कि Reliance Jio भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम ऑपरेटर है, जिसके पास 500 मिलियन (50 करोड़) से अधिक यूजर्स हैं। डिजिटल इंडिया के विज़न को साकार करने में जियो की भूमिका निर्णायक रही है। सस्ते डेटा, 5G नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने जियो को एक साधारण टेलीकॉम कंपनी से कहीं आगे ले जाकर डिजिटल इकोसिस्टम लीडर बना दिया है।
AI और डिजिटल बिज़नेस में विस्तार: जियो का भविष्य दृष्टिकोण
पिछले छह वर्षों में, जियो ने केवल टेलीकॉम तक खुद को सीमित नहीं रखा। हमने देखा है कि कंपनी ने Artificial Intelligence (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में आक्रामक निवेश किया है।
जियो में निवेश करने वालों में शामिल हैं:
- KKR
- General Atlantic
- Silver Lake
- Abu Dhabi Investment Authority (ADIA)
इन वैश्विक निवेशकों की भागीदारी यह संकेत देती है कि जियो का बिजनेस मॉडल लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और स्थिर रिटर्न पर आधारित है।
2.5% पब्लिक फ्लोट नियम और सेबी का प्रस्ताव
हमारे अनुसार, रिलायंस केवल 2.5% शेयर लिस्ट करना चाहता है क्योंकि कंपनी का आकार बेहद विशाल है। वर्तमान में भारत में बड़े IPOs के लिए 5% न्यूनतम पब्लिक फ्लोट का नियम है, लेकिन भारतीय बाजार नियामक (SEBI) ने इसे घटाकर 2.5% करने का प्रस्ताव दिया है, जो अभी वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
कंपनी का मानना है कि कम हिस्सेदारी की बिक्री से प्राइसिंग टेंशन बनेगी, जिससे बेहतर वैल्यूएशन हासिल किया जा सकेगा।
$200–$240 बिलियन वैल्यूएशन की चर्चा
हालांकि Jefferies ने जियो का वैल्यूएशन $180 बिलियन आंका है, लेकिन कुछ इन्वेस्टमेंट बैंकरों का मानना है कि जियो का वैल्यूएशन $200 से $240 बिलियन तक जा सकता है। यह निर्भर करेगा:
- बाजार की स्थिति
- AI और डिजिटल बिजनेस की ग्रोथ
- IPO स्ट्रक्चर (OFS या फ्रेश इश्यू)
फिलहाल रिलायंस ने किसी फाइनल नंबर पर मुहर नहीं लगाई है।
IPO स्ट्रक्चर: OFS या नया शेयर इश्यू?
हम यह भी देख रहे हैं कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि Jio IPO केवल Offer For Sale (OFS) होगा या इसमें नए शेयर जारी किए जाएंगे। उदाहरण के लिए, Hyundai Motor India का IPO पूरी तरह OFS था और उसमें कंपनी को नया कैपिटल नहीं मिला।
जियो IPO में यह फैसला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इससे:
- कैपिटल स्ट्रक्चर
- प्रमोटर हिस्सेदारी
- निवेशकों की भागीदारी
तीनों प्रभावित होंगे।
भारत का IPO बाजार: वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति
जियो की लिस्टिंग ऐसे समय पर आने वाली है जब भारत का IPO बाजार जबरदस्त तेजी में है। LSEG डेटा के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राइमरी इक्विटी मार्केट रहा, जहां $21.6 बिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई गई।
जियो IPO इस मोमेंटम को और मजबूत करेगा।
Morgan Stanley और Kotak कर रहे हैं ड्राफ्टिंग का काम
हालांकि अभी औपचारिक नियुक्ति नहीं हुई है, लेकिन हमें यह जानकारी मिलती है कि Morgan Stanley और Kotak Mahindra Capital के बैंकर पहले से ही IPO प्रॉस्पेक्टस तैयार करने में रिलायंस के साथ काम कर रहे हैं। IPO डॉक्यूमेंटेशन एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होती है, जो कई महीनों तक चलती है।
एलन मस्क की Starlink से सीधी टक्कर
आने वाले समय में जियो को एलन मस्क की Starlink इंटरनेट सेवा से सीधी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, जो भारत में लॉन्च की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही, जियो ने Nvidia के साथ AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए साझेदारी की है, जो इसे टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर और मजबूत बनाती है।
2026 की पहली छमाही में लिस्टिंग का लक्ष्य
अगस्त में मुकेश अंबानी ने स्पष्ट किया था कि जियो का IPO 2026 की पहली छमाही में लाया जाएगा। हालांकि, अंतिम समय-सीमा बाजार की परिस्थितियों और रेगुलेटरी मंजूरी पर निर्भर करेगी।
विदेशी निवेशकों के लिए एग्जिट का अवसर
हम यह भी समझते हैं कि हाल के वर्षों में जियो में निवेश करने वाले कई विदेशी निवेशक IPO के जरिए एग्जिट लेना चाहेंगे। यह IPO उनके लिए लिक्विडिटी और रिटर्न दोनों का बड़ा अवसर साबित हो सकता है।

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