हम एक ऐसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) अपने अंतिम चरण में पहुँच गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस सप्ताह ब्रुसेल्स की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, जिसका उद्देश्य वार्ताकारों को रणनीतिक दिशा देना और लंबित मुद्दों को अंतिम रूप देना है। यह यात्रा भारत-EU आर्थिक संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखी जा रही है।
14 दौर की वार्ता के बाद निर्णायक हस्तक्षेप
पिछले 42 महीनों में 14 दौर की गहन बातचीत के बाद अब यह समझौता एक ऐतिहासिक जंक्चर पर खड़ा है। हम देख रहे हैं कि मंत्री स्तर पर यह हस्तक्षेप ऐसे समय पर हो रहा है जब तकनीकी और नीतिगत मतभेदों को सुलझाने की तत्काल आवश्यकता है। पीयूष गोयल अपने EU समकक्ष मारोश शेफचोविच (Maroš Šefčovič) के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे, जिससे वार्ता को निर्णायक गति मिलने की उम्मीद है।
जनवरी 8-9 की ब्रुसेल्स यात्रा का महत्व
सरकारी बयान के अनुसार, यह यात्रा 8-9 जनवरी को होगी और इसे “महत्वपूर्ण” करार दिया गया है। हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच राजनयिक एवं तकनीकी स्तर पर संपर्क लगातार गहरा हो रहा है। यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि India-EU FTA को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक दबाव बनाने का संकेत है।
पहले से सक्रिय भारतीय वार्ताकार दल
पीयूष गोयल की यात्रा से पहले ही भारत का वार्ताकार दल, मुख्य वार्ताकार के नेतृत्व में, ब्रुसेल्स में EU प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहा है। हमारे वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी ब्रुसेल्स में मौजूद हैं और वरिष्ठ EU अधिकारियों के साथ मिलकर तकनीकी अड़चनों को सुलझाने में जुटे हैं। यह समन्वित प्रयास दर्शाता है कि हम इस समझौते को केवल बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि व्यावहारिक समाधान पर पहुँचना चाहते हैं।
India-EU Summit से पहले मतभेद सुलझाने की रणनीति
हमारी रणनीति स्पष्ट है—भारत-EU शिखर सम्मेलन से पहले सभी प्रमुख मतभेदों को सुलझाना, ताकि FTA को औपचारिक रूप से समापन की ओर ले जाया जा सके। दिसंबर 24 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, पीयूष गोयल की यह यात्रा खास तौर पर लंबित विवादास्पद मुद्दों को सुलझाने के लिए है, जिससे शिखर सम्मेलन में ठोस परिणाम सामने आ सकें।
उच्चस्तरीय बैठकों की मजबूत पृष्ठभूमि
पिछले सप्ताह ब्रुसेल्स में हुई गहन मंत्रणा इस यात्रा की मजबूत पृष्ठभूमि तैयार करती है। 6-7 जनवरी को राजेश अग्रवाल और यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक सबीन वेयांड (Sabine Weyand) के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने कई जटिल मुद्दों पर सहमति की नींव रखी है। हम इसे एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं, जहाँ हर बैठक अगले कदम को आसान बना रही है।
नौ साल के अंतराल के बाद फिर शुरू हुई वार्ता
यह उल्लेखनीय है कि India-EU FTA वार्ता को जून 2022 में फिर से शुरू किया गया था, इससे पहले यह प्रक्रिया नौ वर्षों से अधिक समय तक ठप पड़ी थी। वार्ता की पुनः शुरुआत इस बात का प्रमाण है कि दोनों पक्ष आर्थिक एकीकरण को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। तब से अब तक मंत्रिस्तरीय स्तर पर कई संवाद हो चुके हैं, जिनमें दिसंबर 2025 की बैठक भी शामिल है।
EU: भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
हम जानते हैं कि यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में वस्तुओं के द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही EU, भारत में प्रमुख निवेशक भी है। यह FTA केवल व्यापार बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि निवेश, आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार सृजन के लिए भी एक मजबूत ढांचा प्रदान करेगा।
आधुनिक आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप समझौता
हम इस समझौते को केवल पारंपरिक टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं देख रहे हैं। India-EU FTA को एक समग्र आर्थिक साझेदारी के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा अधिकार, सतत विकास, श्रम मानक, पर्यावरण संरक्षण और डेटा गवर्नेंस जैसे आधुनिक विषय शामिल हैं। यह दृष्टिकोण इसे 21वीं सदी के सबसे प्रासंगिक व्यापार समझौतों में से एक बनाता है।
भारतीय उद्योग और MSME के लिए नए अवसर
हमारे दृष्टिकोण से यह समझौता भारतीय उद्योग, विशेषकर MSME सेक्टर, के लिए नए द्वार खोलेगा। EU के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच से भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, आईटी सेवाएं और एग्री-प्रोड्यूस जैसे क्षेत्रों में निर्यात में तेज़ वृद्धि की संभावना है।
रणनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व
हम यह भी मानते हैं कि यह FTA केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव और आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत-EU साझेदारी स्थिरता और भरोसे का प्रतीक बन सकती है। यह समझौता दोनों पक्षों को दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग की ओर ले जाएगा।
ब्रुसेल्स यात्रा से अपेक्षित परिणाम
पीयूष गोयल की यह यात्रा हमें एक स्पष्ट संदेश देती है—भारत इस समझौते को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उच्चस्तरीय राजनीतिक नेतृत्व की भागीदारी से वार्ता को वह गति मिलती है जो केवल तकनीकी स्तर पर संभव नहीं होती। हम उम्मीद करते हैं कि इस यात्रा के बाद India-EU FTA के अधिकांश प्रमुख अध्यायों पर अंतिम सहमति बन जाएगी।
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